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केंद्र पर शरद पवार का हमला, बोले- दिल्‍ली में बैठकर नहीं होती खेती

Babita Pant

नई द‍िल्‍ली 29 Dec, 2020 07:03 pm

राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) मुखिया शरद पवार (Sharad Pawar) ने राज्‍य सरकारों से सलाह-मशविरा किए बगैर संसद के मानसून सत्र में तीन नए कृषि कानून पारित करने पर मंगलवार को केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. आपको बता दें कि इन कृषि कानूनों के खिलाफ 26 नवंबर से पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्‍ली की अलग-अलग सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं.

केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि देश का कृषि सेक्‍टर दिल्‍ली में बैठकर नहीं चलाया जा सकता. शरद पवार के मुताबिक, "दिल्‍ली में बैठकर खेती नहीं हो सकती क्‍योंकि इसमें गांवों में रह रहे किसानों का कठिन श्रम शामिल है और इस मामले में राज्‍य सरकारों के कंधों पर बड़ी जिम्‍मेदारी है."

वहीं, शरद पवार ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के उन आरोपों का भी खंडन किया जिसमें उन्‍होंने कहा था कि मनमोहन सिंह नीत यूपीए सरकार में बतौर कृषि मंत्री रहते हुए पवार खुद इन कृषि कानूनों को लाना चाहते थे, लेकिन राजनीतिक दबावों की वजह से ऐसा नहीं कर पाए.

शरद पवार ने कहा, "मैं और मनमोहन सिंह भी कृषि सेक्‍टर में कुछ सुधार लाना चाहते थे, लेकिन इस तरह नहीं जैसे अभी हुआ है. उस समय कृषि मंत्रालय ने प्रस्‍तावित सुधारों पर सभी राज्‍यों के कृषि मंत्रियों और कृषि सेक्‍टर के विशेषज्ञों से लंबा विचार-विमर्श किया था." 
  
पवार ने कहा, "तो जब ज्‍यादार राज्‍यों के कृषि मंत्रियों को आपत्ति होती है तो यह केंद्र सरकार और मेरी जिम्‍मेदारी थी कि हम उन्‍हें विश्‍वास में लें और आगे बढ़ने से पहले उनके मुद्दों का समाधान करें."

शरद पवार ने कहा कि अगर इस बार भी केंद्र सरकार ने राज्‍य सरकारों से राय-मशविरा किया होता और उन्‍हें अपने विश्‍वास में लिया होता तो इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती.

एनसीपी मुखिया ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता किसान हैं ही नहीं. पवार ने कहा, "अगर किसान सरकार की प्राथमिकता होते तो यह समस्‍या इतने लंबे समय तक जारी नहीं रहती. फिर वे कहते हैं कि विरोध करने वाले किसान सिर्फ पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं."

इस पर सवाल करते हुए पवार ने कहा, "क्‍या इन किसानों ने राष्‍ट्र की खाद्य सुरक्षा में योगदान नहीं दिया है?"

आपको बता दें कि शरद पवार का बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को बातचीत के लिए बुधवार को बुलाया है. दरअसल, कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन गतिरोध के समाधान के लिए एक बार फिर सरकार से बातीचीत को तैयार हो गए हैं.

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