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Chhath Puja 2020: जानिए छठ पूजा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्‍व

Babita Pant

नई द‍िल्‍ली 19 Nov, 2020 11:54 am

Chhath Puja 2020: हिन्‍दू सनातन धर्म में प्रकृति और मनुष्‍य का नाता बेहद आध्‍यात्मिक है. यहां प्रकृति सिर्फ आवश्‍यकताओं को पूर्ण करने का साधन मात्र नहीं, बल्‍कि ईश्‍वर की तरह परम पूज्‍यनीय है. यही वजह है कि प्रकृति और उसमें निहित सभी तत्‍व देव तुल्‍य हैं और पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा की जाती है. प्रकृति की पूजा सिर्फ अनुष्‍ठान न होकर बल्‍कि उत्‍सव है. ऐसा ही एक पर्व है छठ पूजा (Chhath Puja), जिसमें सूर्य की उपासना की जाती है. यह पर्व मुख्‍य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और दिल्‍ली में धूमधाम से मनाया जाता है. चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व की महिमा का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि छठी मैया (Chhathi Maiya) को मानने वाले लोग चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहे वह वहां इस पर्व को पूरी श्रद्ध और उल्‍लास से मनाते हैं.

छठ पर्व कब मनाया जाता है?
हिन्‍दू पंचांग के अनुसार छठ पर्व कार्तिक मास की षष्‍ठी तिथि को मनाया जाता है. दीपावली से 6 दिन बाद मनाया जाने वाला यह पर्व अक्‍टूबर या नवंबर के महीने में आता है. इस बार छठ पूजा 20 नवंबर को है.

छठ पर्व की तिथि और शुभ मुहूर्त
छठ पर्व की तिथि:
20 नवंबर 2020
षष्‍ठी तिथि प्रारंभ: 19 नवंबर 2020 को रात 9 बजकर 59 मिनट से
षष्‍ठी तिथि समाप्‍त: 20 नवंबर 2020 को रात 9 बजकर 29 मिनट तक
षष्‍ठी के दिन सूर्योदय का समय: सुबह 6 बजकर 48 मिनट
षष्‍ठी के दिन सूर्यास्‍त का समय: शाम 5m बजकर 26 मिनट

छठ पर्व का महत्‍व
हिन्‍दू धर्म में सूर्य सिर्फ सौर मंडल का तारा नहीं, बल्‍कि भगवान हैं. धरती पर जीवन और ऊर्जा के स्रोत सूर्य को हिन्‍दू सनातन धर्म में अलग-अलग तरीके से पूजा जाता है. लेकिन सूर्य की महिमा वाला छठ पर्व इकलौता ऐसा पर्व है जो पूरी तरह से सूर्य भगवान को समर्पित है. छठ पूजा को सूर्य षष्‍ठी, छठ, छठी, छठ पर्व, डाल पूजा और डाल छठ के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व मुख्‍य रूप से संतान और घर-परिवार की खुशहाली, समृद्धि व उन्‍नति की कामना के लिए मनाया जाता है.

छठ पर्व चार दिन तक मनाया जाता है. इस बार छठ पर्व 18 नवंबर से 21 नवंबर के बीच मनाया जाएगा. मुख्‍य दिन यानी कि छठ पर्व 20 नंवबर को है.
 
नहाय खाय: छठ पर्व की शुरुआत कार्तिक मास की चतुर्थी यानी नहाय खाय के साथ होती है. इस दिन पवित्र नदी विशेषकर गंगा में स्‍नान किया जाता है. छठ पूजा का व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन सिर्फ एक समय भोजन करती हैं. 
नहाय खाय की तिथि: 18 नवंबर 2020
सूर्योदय का समय: सुबह 6 बजकर 46 मिनट
सूर्यास्‍त का समय: शाम 5 बजकर 26 मिनट

खरना: छठ पूजा के दूसरे दिन यानी कि कार्तिक मास की पंचमी को खरना कहा जाता है. इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्‍त तक निर्जला यानी कि पानी की एक बूंद पिए बिना व्रत रखा जाता है. खरना के दिन सूर्यास्‍त के समय भगवान सूर्य को प्रसाद अर्पित करने के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं. प्रसाद खाने के तुरंत बाद ही तीसरे दिन का व्रत शुरू हो जाता है.
खरना की तिथि: 19 नवंबर 2020
सूर्योदय का समय: सुबह 6 बजकर 47 मिनट
सूर्यास्‍त का समय: शाम 5 बजकर 26 मिनट

छठ पूजा: छठ के तीसरे दिन यानी कि कार्तिक मास की षष्‍ठी को मुख्‍य पर्व मनाया जाता है, जिसे छठ पूजा कहते हैं. इस दिन भगवान सूर्य यानी कि छठी माई को सूर्यास्‍त यानी कि सूरज के डूबते समय अर्घ्‍य दिया जाता है. यह साल का एकमात्र ऐसा समय है जब डूबते हुए सूर्य को अर्घ्‍य दिया जाता है. तीसरे दिन का व्रत छठ पर्व रात भर चलता है और अगले दिन यानी कि सप्‍तमी को सूर्योदय के समय अर्घ्‍य देकर ही व्रत का पारण किया जाता है.
सूर्योदय का समय: सुबह 6 बजकर 48 मिनट
सूर्यास्‍त का समय: शाम 5 बजकर 26 मिनट

ऊषा अर्घ्‍य: छठ के चौथे दिन यानी कि कार्तिक मास की सप्‍तमी को सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को अर्घ्‍य दिया जाता है. उगते हुए सूर्य को अर्घ्‍य देने के साथ ही छठ पर्व का समापन हो जात है. सूर्य को अर्घ्‍य देने के बाद व्रती महिलाएं अपने 36 घंटे के व्रत का पारण करती हैं. इस वजह से छठ पूजा के चौथे दिन को ऊषा अर्घ्‍य या पारण दिवस भी कहते हैं.
सूर्योदय का समय: सुबह 6 बजकर 49 मिनट
सूर्यास्‍त का समय: शाम 5 बजकर 25 मिनट

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