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Gayatri Mantra: बेहद शक्तिशाली है गायत्री मंत्र, नियमित जाप से मिलते हैं ढेरों फायदे

Fauzia

नई द‍िल्‍ली 12 Sep, 2020 01:59 pm

Gayatri Mantra: शास्त्रों में बहुत से मंत्रों का ज़िक्र मिलता है. हर एक क मंत्र की अपनी विशेषता और प्रभाव हैं. लेकिन सभी मंत्रों में सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली मंत्र है गायत्री मंत्र. गायत्री मंत्र को वेदों की जननी कहा जाता है. इसे गुरु मंत्र और सावित्री मंत्र भी कहा जाता है, जो कि ऋगवेद से लिया गया है. इस महामंत्र को वेदों का एक महत्वपूर्ण अंग बताया गया है. दरअसल, गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) वेदों की ही रचना है. यह यजुर्वेद और ऋगवेद के दो भागों से मिलकर बना है. कहा जाता है इस मंत्र के जप से भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही तरह की उपलब्धियां प्राप्त होती हैं. 

गायत्री मंत्र का महत्‍व
बुद्धिमता को प्रेरित करने वाले इस मंत्र का जप लोग अनादि काल से करते आए हैं और आज भी करते हैं. शिक्षा, एकाग्रता और ज्ञान के लिए गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार आकाशवाणी से ही सृष्टि के रचयिता को गायत्री मंत्र प्राप्त हुआ था. लोक मान्यताओं के अनुसार माता गायत्री को प्रसन्न करने के लिए गायत्री मंत्र का जप करना सबसे अच्छा उपाय है. अगर कोई भी इंसान लंबे समय तक ध्यान करते हुए एकाग्र मन से इस मंत्र का जप करे तो उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य ही पूरी हो जाएंगी.

गायत्री मंत्र
गायत्री मंत्र में कुल 24 अक्षर हैं और सभी 24 अक्षर 24 शक्तियों-सिद्धियों के प्रतीक हैं. यही कारण है कि ऋषियों ने गायत्री मंत्र को भौतिक जगत में सभी मनोकामनाएं पूरा करने वाला बताया है. गायत्री मंत्र इस प्रकार है:
ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। 
धियो यो न: प्रचोदयात्।।

गायत्री मंत्र का भावार्थ
"सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, परमात्‍मा का वह तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करे." आसान शब्दों में गायत्री मंत्र का अर्थ समझना हो तो ऐसे समझ सकते है कि हे शक्तिशाली ईश्वर, हमारी ऊर्जा के स्रोत हमारे ज्ञान को आलोकित करो ताकि हम सदा सन्मार्ग पर चलते रहें. 

गायत्री मंत्र के जाप का उचित समय
दरअसल, गायत्री मंत्र जीवन और प्रकाश देने वाले भगवान सूर्य की उपासना है. शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र के जप का सर्वश्रेष्ठ समय सूर्योदय से थोड़ी देर पहले हैं. जाप सूर्योदेय से थोड़ा पहले शुरू करके सूर्योदय के थोड़ी देर बाद तक कर सकते हैं. अगर तीसरे पहर में गायत्री मंत्र का जप करना हो तो सूर्यास्त से पहले करें. इसके अलावा हवन, जनेऊ धारण के समय भी गायत्री मंत्र का जप किया जाता है. 

गायत्री मंत्र के जाप के नियम
पहले माना जाता था कि इस मंत्र का जप केवल पुरुष ही कर सकते हैं, लेकिन बदलते समय के साथ इस नियम में भी बदलाव आया. अब स्त्रियां भी इस मंत्र का जप कर सकती हैं. जप के दौरान पवित्रता का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है. शौच के समय मंत्रोच्चारण नहीं किया जा सकता. कहा तो यह भी जाता है कि गायत्री मंत्र किसी गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए. गायत्री मंत्र जाप के नियम इस प्रकार हैं:
- गायत्री मंत्र का जप करने वाले का खान-पान शुद्ध और पवित्र होना चाहिए. खान-पान सात्विक हो तो उत्तम है, लेकिन जिनका खान-पान सात्विक नहीं है वो भी इस मंत्र का जप कर सकते हैं.

-गायत्री मंत्र का जप कुश या चटाई के आसन पर बैठकर करना चाहिए और तुलसी या चंदन की माला का प्रयोग करना चाहिए.

-सुबह के समय पूर्व दिशा और शाम के समय पश्चिम दिशा में मुख करके जप करें. 

गायत्री मंत्र के फायदे
गायत्री मंत्र के गुणों का जितना बखान किया जाए उतना कम है. यह जीवन की हर समस्या का अंत करने वाला मंत्र है. इसका जप करने से गुस्से पर भी काबू पाया जा सकता है. इस मंत्र के जप से छह इंद्रियों में सुधार होता है. त्वचा में निखार पैदा होता है. बच्चों के लिए तो इसका नियमित जप बहुत ही लाभकारी है. छात्र इस मंत्र के जप से एकाग्रता को बेहतर कर सकते हैं.

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