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Makar Sankranti 2021: 14 जनवरी को है मकर संक्रांति, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्‍व

Babita Pant

नई द‍िल्‍ली 14 Jan, 2021 11:53 am

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) हिन्‍दू धर्म के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है. देश के अलग-अलग हिस्‍सों में इस पर्व को अलग-अलग नाम से मनाया जाता है. इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है यानी कि पृथ्‍वी का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है. हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है. यही वजह है कि इस पर्व को मुख्‍य रूप से मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है.

सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना ही संक्रांति कहलाता है. एक साल में कुल 12 संक्रांतियां पड़ती हैं, लेकिन उनमें मेष, कर्क, तुला और मकर संक्रांति प्रमुख हैं. हालांकि सभी संक्रांतियों में मकर संक्रांति का विशेष पारंपरिक और धार्मिक महत्‍व है. इस पर्व में मुख्‍य रूप से भगवान सूर्य और भगवान शनि की पूजा का विधान है. इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्‍नान कर दान-पुणय कर करते हैं. मकर संक्रांति में विशेष रूप से तिल और तिल से बनी चीजों का दान किया जाता है. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी.

मकर संक्रांति की तिथि और शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति की तिथि: 14 जनवरी 2021
मकर संक्रांति पुण्‍य काल: 14 जनवरी 2021 को सुबह 8 बजकर 30 मिनट से शाम 5 बजकर 46 मिनट तक
कुल अवधि: 9 घंटे 16 मिनट 
मकर संक्रांति महापुण्‍य काल: 14 जनवरी 2021 को सुबह 8 बजकर 30 मिनट से सुबह 10 बजकर 15 मिनट तक
कुल अवधि: 1  घंटे 45 मिनट

मकर संक्रांति का महत्‍व
मकर संक्रांति का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है. सूर्य देव जब धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति मनाई जाती है. यानी सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं. हिन्‍दू मान्‍यताओं में उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को रात माना जाता है. सूर्य के उत्तरायण होने से देवताओं को जाग्रत माना जाता है. यही वहज है कि मकर संक्राति से शादी-ब्‍याह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है.

हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य धुन राशि से निकलकर अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर मकर राशि में जाते हैं. कहते हैं कि भगवान शनि ने अपने घर आए पिता सूर्य देव की पूजा काले तिलों से की थी. इसी कारण से मकर संक्रांति को तिल संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन विशेष रूप से तिल का दान किया जाता है और तिल से बनी चीजों का सेवन भी किया जाता है.

कहते हैं कि मकर संक्रांति के दिन ही राजा भगीरथ के तप प्रसन्‍न होकर मां गंगा उनके पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम पहुंची और वहां से होते हुए वह समुद्र में जा मिली थीं. यही वजह है कि इस दिन गंगा स्‍नान का विशेष महत्‍व है. मकर संक्रांति को दक्षिण भारत में 'पोंगल', गुजरात-राजस्थान में 'उत्तरायण', हरियाणा- पंजाब में 'माघी' और उत्तराखंड में 'घुघुतिया' के नाम से जाना जाता है. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में इस त्योहार को 'खिचड़ी' कहते हैं.

मकर संक्रांति की पूजा विधि
- मकर संक्रांति के दिन गंगा स्‍नान करना शुभ माना जाता है. अगर गंगा स्‍नान संभव न हो तो घर पर ही अपने नहाने के जल में गंगा जल की कुछ बूंदें मिला लें.
- मकर संक्रांति की पूजा पुण्‍य काल या महापुण्‍य काल में की जाती है.
- इस दिन मुख्‍य रूप से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है. एक थाली में काली व सफेद तिल के लड्डू, जल, फूल और पैसे रखकर भगवान सूर्य को अर्पित करें.
- इसके बाद उन्‍हें जल चढ़ाएं और आरती उतारें.
- पितरों की आत्‍मा की शांति के लिए काली उड़द, चावल और तिल का दान करें. 

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