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LJP में चिराग अलग-थलग, महंगा पड़ा चाचा को धमकाना, पशुपति बने संसदीय दल के नेता

TLB Desk

पटना 15 Jun, 2021 11:49 am

लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के 5 सांसदों की बगावत के बाद पशुपति पारस (Pashupati Paras) पार्टी के संसदीय दल के नेता बने हैं. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पशुपति पारस को संसदीय दल के नेता की मान्यता भी दे दी है. आपको बता दें कि सोमवार देर शाम लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसद पशुपति पारस को LJP के संसदीय दल के नेता के तौर पर मान्यता दी. इससे पहले बागी चाचा पशुपति पारस को मनाने उनके घर पहुंचे चिराग पासवान को एक घंटे के इंतजार के बाद बिना मिले ही लौटना पड़ा.

दरअसल, दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के छोटे भाई पशुपति पारस के नेतृत्व में पार्टी के कुल छह में से पांच सांसदों ने सोमवार को बगावत का ऐलान कर दिया. सांसदों ने चिराग पासवान की जगह पशुपति को अपना नेता चुनते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी सौंपा था, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ने पशुपति पारस को संसदीय दल के नेता के रूप मे मान्यता दी. 

आपको बता दें कि पार्टी में बगावत की नींव बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान में उस समय ही पड़ गई थी जब चिराग ने अपने सांसद चाचा पशुपति पारस को नीतीश की तारीफ करने पर पार्टी से निकालने की चेतावनी दी थी. पशुपति पारस JDU के खिलाफ LJP उम्‍मीदवार उतारने के खिलाफ थे. इस बात से चिराग नाराज हो गए और उन्‍होंने अपने चाचा को पार्टी से बाहर का रास्‍ता दिखाने की धमकी दे डाली. 

वहीं, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग हटकर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के चिराग पासवान के फैसले से पार्टी के सदस्‍य उनसे नाराज थे. कहा जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर पार्टी के भीतर इतनी नाराजगी थी कि छह लोकसभा सदस्‍यों में से पांच ने चिराग पासवान को नेता मानने से इंकार कर दिया और वे सभी पशुपति पारस के समर्थन में खड़े हो गए हैं. आपको बता दें कि पशुपति पारस दिवंगत रामविलास पासवान के भाई और इस नाते चिराग पासवान के चाचा हैं.

वहीं, जेडीयू ने इस झगड़े के बीच चिराग को अलग-थलग करते हुए पहले इकलौते बीजेपी विधायक को जेडीयू में शामिल किया और फिर 200 पदाधिकारियों को पार्टी की सदस्‍यता दिलाई. अब लोजपा के संसदीय दल में भी सेंध लग गई और चिराग के हाथों पार्टी की बागडोर पूरी तरह से फिसल गई है.

अब देखना यह होगा कि एलजेपी के बागी सांसद चिराग पासवान को पार्टी से बाहर का रास्‍ता दिखाते हैं या खुद जेडीयू का दामन थामते हैं.

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