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रिज़र्व बैंक ने नहीं घटाईं ब्याज दरें, इस साल लगभग 10 प्रतिशत घटेगी इकॉनमी

Babita Pant

नई द‍िल्‍ली 09 Oct, 2020 02:53 pm

रिज़र्व बैंक (Reserve Bank) ने क़र्ज़ पर ब्याज दरों में कोई रियायत नहीं दी है. बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए अपनी मौद्रिक नीति का एलान किया. उन्होंने कहा कि रिज़र्व बैंक, जिस दर पर बैंकों को क़र्ज़ देता है और उनके जमा पैसे पर ब्याज देता है, उन दोनों दरों यानी रेपो रेट व रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है. आपको बता दें कि रेपो रेट वो ब्याज दर है, जिस पर रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को क़र्ज़ देता है. वहीं, रिवर्स रेपो रेट ब्याज की वो दर है, जो वो अपने पास जमा बैंकों के धन पर देता है.

रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून तक इकॉनमी में जो गिरावट आई थी, उससे अर्थव्यवस्था उबर रही है. हालांकि, जीडीपी में गिरावट की स्थिति अभी बनी हुई है और इस वित्तीय वर्ष में देश की GDP लगभग दस प्रतिशत तक कम होगी.
 
रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि सरकार ने अनलॉक की जो प्रक्रिया शुरू की है, उससे इकॉनमिक गतिविधियां पटरी पर लौट रही हैं. ऑटो सेल्स और रिटेल सेक्टर में काफ़ी सुधार देखा जा रहा है. पेट्रोल की खपत कोविड-19 से पहले के स्तर तक पहुंच गई है. जबकि डीज़ल की खपत भी कोविड-19 के पहले के स्तर के बेहद क़रीब पहुंच गई है. इसके अलावा अन्य सेक्टर्स जैसे अंतररराज्यीय परिवहन में भी इज़ाफ़ा हो रहा है. 

ये वो सूचकांक या संकेत हैं, जो देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का इशारा करते हैं. 

सरकार ने अगस्त महीने में जीडीपी के जो आंकड़े जारी किए थे, उनके मुताबिक़, अप्रैल से जून के दौरान देश की अर्थव्यवस्था लगभग 24 प्रतिशत सिकुड़ गई थी. इसकी सबसे बड़ी वजह कोरोना वायरस का प्रकोप रोकने के लिए लगाया गया लॉकडाउन था.

 लेकिन, जून महीने से सरकार ने अनलॉक की प्रक्रिया की शुरुआत की थी. 30 सितंबर को ही सरकार ने अनलॉक-5 के लिए गाइडलाइन्स जारी की हैं. जिनमें लगभग सभी सेक्टर्स को धीरे-धीरे खोलने की इजाज़त दे दी गई है.

रिज़र्व बैंक को अपनी दूसरी तिमाही की मौद्रिक नीति जारी करने में देर हो गई. इसकी वजह ये थी कि बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के तीन सदस्यों के पद खाली थे. सरकार ने इन पदों पर नए मेम्बरान की नियुक्ति नहीं की थी. इसके कारण, पहली बार रिज़र्व बैंक को अपनी मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक को स्थगित करना पड़ा था. 

सरकार ने तीन अर्थशास्त्रियों आशिमा गोयल, जयंत वर्मा और शशांक भिड़े को हाल ही में सदस्य के तौर पर नियुक्त किया था. इसके बाद रिज़र्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक सात अक्टूबर को हो सकी.

कोरोना वायरस के कारण दुनिया के तमाम देशों की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आई है. लेकिन, सबसे ज़्यादा कमी भारत की इकॉनमी में ही देखी गई है. 

पिछले कुछ महीनों के दौरान अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने के लिए सरकार ने सुधार के कई क़दम उठाए हैं. फिर चाहे कृषि क्षेत्र से संबंधित क़ानून हों या लेबर लॉ में बदलाव. 

उम्मीद की जा रही है कि इनका लाभ आने वाले समय में देखने को मिलेगा.
 
वैसे रिज़र्व बैंक से ये उम्मीद थी कि वो ब्याज दरों में कमी करेगा. लेकिन, ऐसा नहीं हुआ. क्योंकि रिज़र्व बैंक के ब्याज दर घटाने पर ही बैंक अपने क़र्ज़ों पर ब्याज घटाते हैं. जिससे लोगों को कारोबार या ख़रीदारी के लिए सस्ती दरों पर लोन मिल सके. या लोगों को क़र्ज़ चुकाने में सहूलत हो जाए.

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