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कश्‍मीर में BJP कार्यकर्ताओं की हत्‍या पर बोले जेपी नड्डा, बेकार नहीं जाएगा बलिदान

Babita Pant

नई द‍िल्‍ली 30 Oct, 2020 12:44 pm

बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने जम्‍मू-कश्‍मीर में मारे गए पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं की हत्‍या की शुक्रवार को कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उनका ये बलिदान व्‍यर्थ नहीं जाएगा. आपको बता दें कि कुलगाम में आतंकवादियों ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिला महासचिव फिदा हुसैन इट्टू, इकाई के सदस्‍य उमर राशिद बेग और एक अन्‍य सदस्‍य उमर हाजिम की गोलियों से भूनकर हत्‍या कर दी. पुलिस के मुताबिक घटना कुलगाम के वाईके पोरा इलाके में गुरुवार शाम को घटित हुई.

इस घटना की आलोचना करते हुए जेपी नड्डा ने ट्वीट कर लिखा, "जम्मू-कश्मीर के कुलगाम मे कायराना हमले में आतंकवादियों ने ज़िला भाजपा युवा मोर्चा के महासचिव फिदा हुसैन समेत 3 नेताओं की हत्या कर दी. ऐसे राष्ट्रभक्तों का जाना देश के लिये बड़ी क्षति है. पूरा समाज पीड़ित परिवारो के साथ है. ये बलिदान व्यर्थ नहीं जाएंगे. परिवारों के प्रति संवेदना.

जानकारी के मुताबिक, बीजेपी युवा मोर्चा के महासचिव फिदा हुसैन अपने दो साथियों उमर रमजान और हारून बेग के साथ घर की तरफ जा रहा थे. रास्ते में वाईके पोरा इलाके में घात लगाकर बैठे आतंकियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं और हमला के बाद आतंकी वहां से फरार हो गए.

बताया जा रहा है कि कुलगाम पुलिस को गुरुवार रात 8 बजे बीजेपी के तीन नेताओं पर आतंकी हमले की सूचना मिली थी. इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आतंकवादियों ने बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं पर गोली चलाई है. इस हमले में तीनों घायल हो गए. इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. हमले के बाद पूरे इलाके में सनसनी का माहौल है.

बीजेपी की जम्‍मू-कश्‍मीर इकाई ने भी इस "नृशंस आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा" करते हुए कहा है कि जो लोग इसके लिए जिम्‍मेदार हैं उन्‍हें बख्‍शा नहीं जाएगा. वहीं, पूर्व डिप्‍टी सीएम कविंद्र गुप्‍ता ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और पीडीपी नेताओं के उकसावे में आकर ही इस हत्‍याकांड को अंजाम दिया गया है.

कविंदर गुप्‍ता के मुताबिक, "हमने अपने तीन समर्पित कार्यकर्ताओं को खो दिया है- फिदा हुसैन इट्टू, उमर राशिद बेग और उमर रजमान हाजम कायरतापूर्ण आतंकी हमले में मारे गए. मुझे लगता है कि NC और पीडीपी के जो नेता खुद को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं वे इस तरह के हमलों के पीछे हैं. हालांकि हम इसे सहन नहीं करेंगे और हत्‍यारों को भी इसी तरह जवाब दिया जाएगा."

इसी के साथ कविंद्र गुप्‍ता ने यह भी कहा कि तीन समर्पित कार्यकर्ताओं की हत्‍या से बीजेपी और राष्‍ट्र को बड़ा नुकसान हुआ है. उनके मुताबिक, "कश्‍मीर घाटी में जो लोग तिरंगे को थामकर चलना चाहते हैं यह उनकी आवाज दबाने की कोशिश है, लेकिन हम इससे डरेंगे नहीं और राष्‍ट्रवाद की ये लहर रुकने वाली नहीं है. मामले की जांच चल रही है."

जम्‍मू-कश्‍मीर के बीजेपी प्रमुख रविंद्र रैना ने भी कविंद्र गुप्‍ता के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा है, "गुपकर गैंग का उकसावा इन घटनाओं के लिए जिम्‍मेदार है. वे राष्‍ट्र के खिलाफ साजिश रच रहे हैं और वे अपने बयानों में बार-बार पाकिस्‍तान और चीन का जिक्र करते हैं. वे कश्‍मीर के लोगों को भड़का रहे हैं. उन्‍हें आग से नहीं खेलना चाहिए क्‍योंकि ऐसा करने से राष्‍ट्र विरोधी ताकतों को बल मिलता है और लोग असमंजस में पड़ जाते हैं. वे माहौल को खराब कर रहे हैं."

आपको बता दें कि अनुच्छेद 370 हटाने के खिलाफ सियासी एकजुटता को लेकर एक साल पहले गुपकर समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए थे. फारूक अब्दुल्ला के श्रीनगर स्थित आवास पर पिछले साल अगस्‍त में जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं की बैठक हुई थी. इसी बैठक में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा वापस दिलाने के प्रतिबद्धता जताई गई थी. बैठक में मौजूद सभी नेताओं ने ''गुपकर समझौते'' पर हस्ताक्षर किए थे. फारूक अब्दुल्ला इसके अध्‍यक्ष हैं और संगठन को आकार देने व उसे आगे ले जाने के लिए महबूबा मुफ्ती को उपाध्‍यक्ष बनाया गया है.

रैना ने यह भी कहा कि आतंकवादी और उनके हमदर्द कश्‍मीर में 26 अक्‍टूबर को पहली बार मनाए गए एक्‍सेशन डे (Accession Day) के जश्‍न से बेकल हो गए हैं. उन्‍होंने कहा, "ये नेता भी जश्‍न में शरीक हुए थे. अपराधियों को अपने पापों की भारी सजा भुगतनी होगी."

आपको बता दें कि 73 साल पहले 26 अक्‍टूबर को जम्‍मू-कश्‍मीर का भारत में विलय हुआ था. उस समय पाकिस्‍तान की ओर से घुसपैठिए जम्‍मू कश्‍मीर में भेजे गए थे. तब 26 अक्‍टूबर को तत्‍कालीन महाराजा हरि सिंह ने स्थितियों को देखते हुए राज्‍य के भारत में विलय के लिए एक कानूनी दस्‍तावेज को साइन किया था. इस दस्‍तावेज को 'इंस्‍ट्रूमेंट ऑफ एक्‍सेशन' नाम दिया गया था.

गौरतलब है कि इस घटना से पहले जुलाई में बीजेपी नेता शेख वसीम बारी, उनके भाई और पिता के अलावा कांग्रेस सरपंच अजय पंडिता की भी हत्‍या कर दी गई थी. तब बारामुला के मारूफ भट ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफा दे दिया था. इसके साथ ही हंदवाड़ा की सामाजिक कार्यकर्ता मुबीना बानो ने भी पार्टी छोड़ दी थी. उस वक्‍त एक ही महीने में पार्टी से तीन-तीन नेताओं ने इस्‍तीफा दे दिया था.

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