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विश्‍व भारती के 100 साल पूरे, PM बोले- टैगोर का विजन आत्‍मनिर्भर भारत का भी सार

Babita Pant

नई द‍िल्‍ली 24 Dec, 2020 02:56 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बंगाल के बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन में स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को वर्चुअली संबोधित किया. अपने संबोधन में उन्‍होंने विश्व भारती के लिए गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के विजन को आत्मनिर्भर भारत का भी सार बताया. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक, "विश्वभारती की सौ वर्ष की यात्रा बहुत विशेष है. विश्वभारती, मां भारती के लिए गुरुदेव के चिंतन, दर्शन और परिश्रम का एक साकार अवतार है. भारत के लिए गुरुदेव ने जो स्वप्न देखा था, उस स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिए देश को निरंतर ऊर्जा देने वाला ये एक तरह से आराध्य स्थल है."

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमारा देश, विश्व भारती से निकले संदेश को पूरे विश्व तक पहुंचा रहा है. भारत आज इंटरनेशनल सोलर अलायंस के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में विश्व का नेतृत्व कर रहा है. भारत आज इकलौता बड़ा देश है जो पेरिस अकॉर्ड के पर्यावरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने के सही मार्ग पर है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है" आत्मनिर्भर भारत अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग है. ये अभियान, भारत को सशक्त करने का अभियान है, भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है.

पीएम मोदी ने कहा, "जब हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं तो हमारे मन में सीधे 19-20वीं सदी का विचार आता है. लेकिन ये भी एक तथ्य है कि इन आंदोलनों की नींव बहुत पहले रखी गई थी. भारत की आजादी के आंदोलन को सदियों पहले से चले आ रहे अनेक आंदोलनों से ऊर्जा मिली थी. भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता को भक्ति आंदोलन ने मजबूत करने का काम किया था. भक्ति युग में, हिंदुस्तान के हर क्षेत्र, हर इलाके, पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, हर दिशा में हमारे संतों ने, महंतों ने, आचार्यों ने देश की चेतना को जागृत रखने का प्रयास किया."

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वेद से विवेकानंद तक भारत के चिंतन की धारा गुरुदेव के राष्ट्रवाद के चिंतन में भी मुखर थी और ये धारा अंतमुर्खी नहीं थी. वो भारत को विश्व के अन्य देशों से अलग रखने वाली नहीं थी. उनका विजन था कि जो भारत में सर्वश्रेष्ठ है, उससे विश्व को लाभ हो और जो दुनिया में अच्छा है, भारत उससे भी सीखे.

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