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अमेरिका का वार: भारत पर सीधे 50% टैरिफ – शेयर बाजार में भूचाल

Babita Pant

India 07 Aug, 2025 03:38 pm

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 अगस्त, 2025 को अचानक घोषणा की कि भारत से आयातित वस्तुओं पर लगाया गया टैरिफ पहले 25% था, जिसे बढ़ाकर सीधे 50% कर दिया गया है। यह निर्णय तत्कालीन “अमेरिका फर्स्ट” व्यापार नीति के अंतर्गत आया है, जिसमें ट्रंप विदेशों को अमेरिकी हितों के अनुरूप लाने की कोशिश कर रहे थे।

भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव

इस घोषणा के बाद से ही भारतीय शेयर बाजार में बेतहाशा गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 500 से अधिक अंक की गिरावट देखी गई, और निवेशकों को लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह गिरावट बाजार की अस्थिरता और विदेशी दबाव को दर्शाती है।

आर्थिक और व्यापारिक प्रभाव

भारत निर्यात केंद्रित उद्योगों, जैसे कृषि, टेक्नोलॉजी, औद्योगिक वस्तुओं, पर अमेरिकी टैरिफ की इस वृद्धि से गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। निर्यातकों को नए शुल्क भार का सामना करना पड़ेगा, जिससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर होगी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि अमेरिका टैरिफ वापस नहीं लेता, तो भारत को भी अमेरिका पर 50% प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाना चाहिए।

वहीं, संसद में विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार की विदेश नीति और कूटनीतिक स्थिरता पर सवाल उठाए हैं, जबकि बीजेपी ने स्पष्ट कहा है कि भारत दबने वाला नहीं है”, और सभी निर्णय राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होंगे।

वैश्विक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

इस टैरिफ निर्णय के सामने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल रूस की यात्रा पर हैं, जहाँ रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की जा रही है। यह दौरा भारत की बहुपक्षीय राजनीति में सामरिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।

आगे क्या हो सकता है?

  • भारत-यूएस दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक गतिरोध गहराया तो व्यापार समझौतों एवं चर्चाओं में गति आएगी।
  • सरकार की प्रतिक्रिया (जैसे टैरिफ चेतावनी या विदेश नीति में मजबूती) अगले सप्ताह की राजनीतिक, वित्तीय चर्चाओं का केंद्र बनी रहेगी।
  • बाजार की अस्थिरता जारी रह सकती है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

अमेरिका द्वारा लगाए गए इस टैरिफ के मौसम में भारत के व्यापारिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। यह केवल व्यापारिक निर्णय नहीं बल्कि वैश्विक रणनीतिक गठजोड़ों, कूटनीतिक संतुलन, और आंतरिक आर्थिक संरचना पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है

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