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श्रीकृष्ण जन्मस्थान में मस्जिद को लेकर शुरू हुआ विवाद, जानिए क्या है 1968 का वह समझौता जिस पर है विवाद

Fauzia

मथुरा 28 Sep, 2020 08:27 pm

वर्षों की लड़ाई के बाद अयोध्या में राम मंदिर का विवाद सुलझा तो अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान में मस्जिद को लेकर विवाद शुरु हो गया है. श्रीकृष्ण के भक्तों ने भी मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में बनी ईदगाह को वहां से हटाने की मांग की है और इस संबंध में मथुरा की अदालत में याचिका दाखिल की गई है जिसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है. याचिका पर 30 सितंबर से सुनवाई होने के आसार हैं. याचिका में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर की 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक मांगा गया है. इसके साथ ही मंदिर स्थल से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की अपील की गई है.

याचिका में कहा गया है कि मुगल शासक औरंगज़ेब के शासन काल में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ही ईदगाह बना दी गई थी. इस मसले को लेकर कोर्ट में दशकों तक मामला चला था और 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच समझौता कराया गया था. समझौते के तहत तय किया गया था कि जितने हिस्से में ईदगाह बनी है वो वहीं बने रहेगी.

लेकिन अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्था उस जगह पर अपना मालिकाना हक़ बताकर उसे वापस लेने की मांग कर रहा है. इस संबंध में लखनऊ की रहने वाली रंजना अग्निहोत्री और त्रिपुरारी त्रिपाठी, सिद्धार्थ नगर के राजेश मणि त्रिपाठी और दिल्ली निवासी प्रवेश कुमार, करुणेश कुमार शुक्ला और शिवाजी सिंह ने शाही ईदगाह मस्जिद को जमीन देने के फैसले को गलत बताते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन छाया शर्मा की कोर्ट में दावा पेश किया है. 

आपको बताते चलें कि 1940 में पंडित मदनमोहन मालवीय श्रीकृष्ण जन्मभूमि आए थे और यहां कि दुर्दशा देखकर काफ़ी दुखी हुए थे. बाद में 1943 में मदन मोहन मालवीय की इच्छा पर उद्योगपति जुगलकिशोर बिड़ला ने कटरा केशव देव को राजा पटनीमल से तत्कालीन उत्तराधिकारियों से खरीद लिया और 1951 में तय किया गया कि यहां दोबारा कृष्ण मंदिर बनवाया जाएगा और ट्रस्ट उसका प्रबंधन करेगा. इसी उद्देश्य से ट्रस्ट का गठन किया गया. इसके बाद 1958 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ नाम की संस्था की स्थापना की गई. कानूनी तौर पर इस संस्था को जमीन पर मालिकाना हक़ हासिल नहीं था, लेकिन इसने ट्रस्ट के लिए तय सारी भूमिकाएं निभानी शुरु कर दीं.

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साल 1964 में पूरी जमीन पर नियंत्रण के लिए एक सिविल केस दायर किया गया लेकिन 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और मुस्लिम पक्ष के बीच समझौता कर लिया गया. मुस्लिम पक्ष ने मंदिर के लिए अपने कब्जे की कुछ जगह छोड़ दी थी. अब दावा है कि आज जिस जगह पर मस्जिद बनी है वो श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के नाम पर है. 

इससे पहले मथुरा के सिविल जज की अदालत में एक और मामला दाखिल किया गया था जिसे श्रीकृष्ण जन्म सेवा संस्थान और ट्रस्ट के बीच समझौते के आधार पर बंद कर दिया गया था. 20 जुलाई 1973 को इस संबंध में कोर्ट ने एक निर्णय दिया था. अभी जो अदालत में मामला दाखिल किया गया है उसमें अदालत के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई है. साथ ही मांग की गई है कि विवादित स्थल को बाल कृष्ण का जन्मस्थान घोषित किया जाए. 

लेकिन मौजूदा मामले में एक पेंच और है. इस केस में प्लेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट एक बड़ी रुकावट है. इस एक्ट के अनुसार 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था उसकी रहेगा. इस एक्ट के तहत सिर्फ रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद को ही छूट दी गई थी.

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