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व्हाट द पिग! अब कंप्यूटर चिप से हो सकेगा याददाश्त जाने और अल्‍जाइमर जैसी दिमाग़ी बीमारियों का इलाज!

Atit

न्‍यूयार्क 31 Aug, 2020 12:32 pm

सोशल मीडिया पर इस समय एक सुअर की बड़ी चर्चा हो रही है. पूरी दुनिया में उसका नाम, उससे संबंधित सर्च किए जा रहे हैं. 

इस सुअर का नाम है-जेरट्रूड (Gertrude). ये सुअर, सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. असल में इसकी वजह ये है कि जेरट्रूड की मदद से इंसान अपनी कई बीमारियों का इलाज खोज सकता है.

‘जेरट्रूड, द पिग' की चर्चा दुनिया में उस वक़्त शुरू हुई, जब अमेरिका में नई-नई तकनीकों पर काम करने वाले उद्यमी एलन मस्क ने एक वेबकास्ट किया. इसमें एलन मस्क ने दुनिया के सामने, ‘थ्री लिटिल पिग डेमो’ को सामने रखा.

वेबकास्ट के दौरान मस्क ने जेरट्रूड और एक अन्य अनाम सुअर के बारे में बताया कि उनके दिमाग़ में एक कंप्यूटर चिप लगाया गया है. और सुअरों का अपना दिमाग़, इन चिप के साथ शानदार तालमेल के साथ काम कर रहा है.

एलन मस्क के वेबकास्ट के दौरान जेरट्र्डू को अपने थूथन का इस्तेमाल करते हुए घास-फूस सूंघते और कुछ खाते हुए हुए देखा गया.

बाद में मस्क ने ये भी बताया कि इस प्रयोग में कंप्यूटर चिप को जेरट्रूड के दिमाग़ के उस हिस्से में लगाया गया है, जो उसके थूथन को कंट्रोल करता है.

इस प्रयोग से इंसान की कई बीमारियों के इलाज में इंक़लाब आ सकता है.

मस्क ने बताया कि ये प्रयोग उनकी न्यूरोसाइंस की स्टार्ट-अप कंपनी न्यूरालिंक ने किया है. और इससे, आगे चलकर इंसान के दिमाग़ और मशीनी दिमाग़ यानी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के बीच आपसी तालमेल से काम कराया जा सकेगा.

मस्क ने इस वेबकास्ट में बताया कि उनकी कंपनी ने तीन सुअरों के दिमाग़ में सिक्के के आकार की कंप्यूटर चिप इम्प्लांट की थी. ये प्रयोग लगभग दो महीने पहले शुरू हुआ था. अब तक के नतीजे बताते हैं कि इस प्रयोग के दौरान जेरट्रूड समेत तीनों सुअरों का क़ुदरती ज़हन और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से लैस चिप, आपस में मिल जुल कर काम कर रहे हैं. उनके बर्ताव में कोई बदलाव नहीं देखा गया है. वो अपने साथ के अन्य सुअरों जैसे बिल्कुल नॉर्मल व्यवहार कर रहे हैं. इससे साफ़ है कि ये प्रयोग सफल रहा है. 

मस्क ने कहा कि, ‘ज़हन में पैबस्त की जा सकने वाली ये चिप आगे चल कर इंसानों में भी लगाई जा सकती है. इससे कई बीमारियों का इलाज मुमकिन हो सकेगा. जैसे कि याददाश्त गुम होना, नींद न आना, सुनने की क्षमता ख़त्म हो जाना और डिप्रेशन वग़ैरह…’

हालांकि, अभी ये साफ़ नहीं है कि क्या मस्क की कंपनी ने इस प्रयोग को इंसानों में भी शुरू कर दिया है. या आगे चल कर न्यूरालिंक कब ऐसा करने वाली है. लेकिन, ये प्रयोग इंसान की कई बीमारियों, जैसे कि-मिर्गी या दिमाग़ को लकवा मार जाने का चमत्कारिक इलाज उपलब्ध करा सकता है.

क़रीब 23 मिलीमीटर आकार की ये चिप अभी किसी इंसान के ज़हन में नहीं लगाई गई है. 

न्यूरोसाइंस की दुनिया में वैसे तो ऐसे प्रयोग पहले भी हुए हैं, जिनमें लोगों के दिमाग़ में कंप्यूटर चिप लगाए गए हैं. लेकिन, उन्हें फिर एक तार के ज़रिए बाहर किसी कंप्यूटर या अन्य डिवाइस से जोड़ा जाता रहा है. इसलिए ऐसा कोई प्रयोग बहुत भारी-भरकम और इस्तेमाल में सहज नहीं रह जाता है.

अगर एलन मस्क का प्रयोग सफल हो जाता है, तो इंसान को दिमाग़ और रीढ़ की हड्‍डी की कई बीमारियों का इलाज आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से करने में सफलता मिल सकती है.

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