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अजा एकादशी 2025: उपवास, तिथि, पूजन विधि और धार्मिक महत्त्व

PujaPandit Desk

नई दिल्‍ली 18 Aug, 2025 02:11 pm

हिंदू पंचांग में एकादशी तिथियाँ विशेष महत्त्व रखती हैं और वर्ष भर कुल 24 एकादशी आती हैं। इनमें से प्रत्येक का अलग आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के बाद आने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु की उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति की कामना करते हैं।

अजा एकादशी 2025 की तिथि और मुहूर्त

  • व्रत आरंभ: 18 अगस्त 2025, शाम 5:22 बजे
  • व्रत समाप्ति: 19 अगस्त 2025, दोपहर 3:32 बजे
  • पारणा (व्रत खोलना): 20 अगस्त 2025, प्रातः 5:15 से 7:49 बजे तक

यह तिथि और मुहूर्त पौराणिक ग्रंथों और पंचांग गणना के अनुसार निर्धारित किया गया है।

पूजन विधि

  1. प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करें।
  2. पीले फूल, तुलसीदल और पीत वस्त्र भगवान विष्णु को अर्पित करें।
  3. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  4. दिनभर उपवास रखकर सात्विक आहार का पालन करें।
  5. रात्रि में भजन-कीर्तन या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  6. पारणा अगले दिन प्रातः उचित मुहूर्त में करें।

धार्मिक महत्व

  • पौराणिक कथा: स्कंद पुराण और पद्म पुराण में वर्णित है कि राजा हरिश्चंद्र ने अजा एकादशी का व्रत रखकर अपने समस्त कष्टों से मुक्ति पाई थी।
  • आध्यात्मिक लाभ: माना जाता है कि इस दिन का व्रत करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति और दुःखों का नाश होता है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: यह एकादशी विष्णुभक्तों के लिए मोक्षदायिनी मानी गई है।

अजा एकादशी सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता और अनुशासन का प्रतीक भी है। उपवास से आत्मसंयम और सात्विक जीवन की प्रेरणा मिलती है। कई स्थानों पर सामूहिक भजन-कीर्तन और कथा पाठ का आयोजन भी होता है, जो धार्मिक एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करता है।

अजा एकादशी का व्रत भारतीय धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक शांति और पापमुक्ति का मार्ग बताता है, बल्कि अनुशासन, संयम और समाज में सौहार्द स्थापित करने का भी संदेश देता है।

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