हिंदू पंचांग में एकादशी तिथियाँ विशेष महत्त्व रखती हैं और वर्ष भर कुल 24 एकादशी आती हैं। इनमें से प्रत्येक का अलग आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के बाद आने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु की उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति की कामना करते हैं।
अजा एकादशी 2025 की तिथि और मुहूर्त
यह तिथि और मुहूर्त पौराणिक ग्रंथों और पंचांग गणना के अनुसार निर्धारित किया गया है।
पूजन विधि
धार्मिक महत्व
अजा एकादशी सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता और अनुशासन का प्रतीक भी है। उपवास से आत्मसंयम और सात्विक जीवन की प्रेरणा मिलती है। कई स्थानों पर सामूहिक भजन-कीर्तन और कथा पाठ का आयोजन भी होता है, जो धार्मिक एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करता है।
अजा एकादशी का व्रत भारतीय धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक शांति और पापमुक्ति का मार्ग बताता है, बल्कि अनुशासन, संयम और समाज में सौहार्द स्थापित करने का भी संदेश देता है।
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