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आईटी कंपनियाँ FY26 भर्ती में फ्रेशर्स पर देंगी जोर

Career16PlusDesk

नई दिल्‍ली 18 Aug, 2025 01:24 pm

भारतीय आईटी उद्योग, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के डिजिटल परिवर्तन का मुख्य स्तंभ है, अब भर्ती में नए ट्रेंड्स की ओर बढ़ रहा है। FY26 के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस और अन्य बड़ी कंपनियाँ फ्रेशर्स को प्राथमिकता देने वाली रणनीति अपना रही हैं। इसका उद्देश्य लागत कम रखना, नई तकनीकों के लिए तैयार प्रतिभा को विकसित करना और वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव के बीच संतुलित विस्तार सुनिश्चित करना है। यह निर्णय नौकरियों की तलाश में लगे युवाओं के लिए बड़ी खबर है।

1. आईटी सेक्टर की मौजूदा स्थिति

पिछले कुछ वर्षों में आईटी उद्योग ने जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा है। महामारी के बाद डिजिटल सेवाओं की मांग में उछाल आया, लेकिन 2023–24 में वैश्विक मंदी, स्टार्टअप्स में निवेश की कमी और अमेरिकी व यूरोपीय बाजारों की अनिश्चितता ने आईटी सर्विसेज कंपनियों की ग्रोथ को धीमा कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, कंपनियों ने नई नियुक्तियों की गति कम कर दी और कई जगह “हायरिंग फ्रीज़” भी देखने को मिला। FY26 में कंपनियाँ इस अनुभव से सीखकर सतर्क और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहती हैं।

2. फ्रेशर्स पर जोर क्यों?

आईटी कंपनियों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे इस बार फ्रेशर्स और एंट्री-लेवल उम्मीदवारों पर ज्यादा निवेश करेंगी। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • लागत-कुशलता: फ्रेशर्स की शुरुआती सैलरी अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे कंपनियों को ऑपरेटिंग खर्च नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

  • सीखने की क्षमता: नए उम्मीदवार तकनीकी बदलावों को जल्दी अपनाते हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसी नई स्किल्स में प्रशिक्षित किए जा सकते हैं।

  • दीर्घकालीन लाभ: कंपनियाँ इन्हें अपनी संस्कृति और तकनीकी ढांचे के हिसाब से गढ़ सकती हैं, जिससे लॉन्ग-टर्म टैलेंट पाइपलाइन तैयार होती है।

3. भर्ती का अनुमान और पैमाना

FY26 में कुल भर्ती वृद्धि केवल 3–5% रहने की संभावना जताई जा रही है। उदाहरण के तौर पर:

  • TCS लगभग 40,000–45,000 फ्रेशर्स को ऑनबोर्ड करने की योजना बना रही है।

  • इंफोसिस करीब 30,000 नए स्नातकों को अवसर दे सकती है।

  • विप्रो और एचसीएल भी संयुक्त रूप से 25,000 से अधिक एंट्री-लेवल हायरिंग कर सकती हैं।

हालांकि अनुभवी पेशेवरों की नियुक्तियाँ सीमित रहेंगी और केवल विशेष प्रोजेक्ट्स या क्लाइंट-डिमांड पर आधारित होंगी।

4. ग्लोबल मार्केट और क्लाइंट प्रेशर का असर

आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका और यूरोप सबसे बड़े मार्केट हैं। वहां की आर्थिक सुस्ती और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के कारण कंपनियों को अपने प्रोजेक्ट्स की ग्रोथ को लेकर सतर्क रहना पड़ रहा है। क्लाइंट्स अब “कम लागत और ज्यादा वैल्यू” की मांग कर रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय आईटी कंपनियाँ हायरिंग में फ्रेशर्स को प्राथमिकता देकर खुद को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना चाहती हैं।

5. रोजगार तलाश रहे युवाओं के लिए अवसर

भारत से हर साल लगभग 15 लाख इंजीनियरिंग और टेक्निकल ग्रेजुएट्स निकलते हैं। ऐसे में यह निर्णय युवाओं के लिए नई नौकरियों का द्वार खोल सकता है। खासकर कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, डाटा साइंस, और क्लाउड तकनीक से जुड़े कोर्स करने वाले छात्रों के लिए यह सुनहरा अवसर है। हालांकि प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही तीव्र होगी, और कंपनियाँ स्किल-बेस्ड टेस्ट और प्रैक्टिकल नॉलेज पर अधिक ध्यान देंगी।

6. कंपनियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम

आईटी कंपनियाँ केवल हायरिंग तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि फ्रेशर्स के लिए री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग प्रोग्राम्स भी शुरू करेंगी।

  • TCS का “Xcelerate Program”

  • Infosys का “Lex Digital Learning Platform”

  • Wipro का “TalentNext Initiative”

इनके ज़रिए फ्रेशर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड प्लेटफॉर्म्स जैसी आधुनिक तकनीकों पर प्रशिक्षित किया जाएगा।

7. विशेषज्ञों की राय

एचआर विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति दोहरी जीत है। एक ओर कंपनियाँ लागत को नियंत्रित रख पाएंगी, दूसरी ओर युवाओं को अवसर मिलेगा। हालांकि, यह भी सच है कि अनुभवी पेशेवरों के लिए नई नौकरियों के अवसर सीमित होंगे। इससे उद्योग में एक “स्किल गैप” भी पैदा हो सकता है, अगर फ्रेशर्स को समय रहते पर्याप्त व्यावहारिक अनुभव न दिया गया।

8. भविष्य का परिदृश्य

FY26 की भर्ती रणनीति से यह साफ है कि आईटी सेक्टर अब “वॉल्यूम-हायरिंग” से हटकर “स्मार्ट-हायरिंग” की ओर बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में कंपनियाँ कम लेकिन अधिक प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम कर्मचारियों पर निवेश करेंगी।

युवाओं के लिए इसका मतलब है — कौशल पर फोकस करो, केवल डिग्री पर नहीं। जो छात्र नवीनतम तकनीकी रुझानों के साथ खुद को अपडेट रखते हैं, वही इस नई भर्ती लहर का सबसे बड़ा लाभ उठा पाएंगे।

आईटी कंपनियों द्वारा फ्रेशर्स पर जोर देने की रणनीति रोजगार जगत में एक बड़ा बदलाव है। यह न केवल कंपनियों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा, बल्कि नए स्नातकों के लिए रोजगार का सुनहरा अवसर भी खोलेगा। हालांकि, अनुभवी पेशेवरों को अब खुद को विशेष कौशलों से लैस करना होगा ताकि वे बदलते उद्योग में प्रासंगिक बने रह सकें।

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