दिल्ली में सोमवार को SIR (Special Intensive Revision) विवाद को लेकर INDIA ब्लॉक का विरोध मार्च सियासी टकराव में बदल गया। संसद परिसर से शुरू हुए इस मार्च का लक्ष्य चुनाव आयोग तक पहुंचना था, लेकिन पुलिस ने बीच रास्ते में रोकते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, संजय राउत समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने पुलिस बैरिकेड पार कर माहौल और गरमा दिया। सरकार ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया।
विरोध का कारण
INDIA ब्लॉक का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत बिहार में मतदाता सूची संशोधन का इस्तेमाल गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं को सूची से हटाने के लिए किया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि आवश्यक दस्तावेजों की सख्त मांग और डिजिटल पहचान न मानने की नीति से लाखों मतदाता वंचित हो सकते हैं।
यह विरोध मार्च संसद परिसर के ‘मकर द्वार’ से शुरू हुआ, जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, संजय राउत और कई अन्य विपक्षी सांसद शामिल हुए। मार्च का लक्ष्य चुनाव आयोग मुख्यालय था, लेकिन पुलिस ने ट्रांसपोर्ट भवन क्षेत्र में बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया।
गिरफ्तारी और हाई-ड्रामा
मार्च शुरू होने के कुछ ही देर बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, संजय राउत समेत कई सांसदों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान अखिलेश यादव ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। विपक्षी सांसदों ने SIR से जुड़े पोस्टर फाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिए और नारेबाजी की।
संसद पर असर
इन गिरफ्तारियों के चलते संसद में विपक्ष की उपस्थिति कम रही, और सरकार ने विपक्ष के हंगामे के बीच राष्ट्रीय खेल एवं एंटी-डोपिंग बिल जैसे अहम विधेयक पास कर लिए। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक बहस से बचने की रणनीति करार दिया।
सरकार और चुनाव आयोग का रुख
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि SIR मतदाता सूची की पारदर्शिता और शुद्धता के लिए जरूरी है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा है और किसी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का प्रयास नहीं है।
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