9 अगस्त 2025 को हिंदी पत्रकारिता शिक्षा जगत ने अपने पितामह, डॉ. रामजी लाल जांगिड को खो दिया। IIMC के हिंदी पत्रकारिता विभाग की स्थापना और उसे राष्ट्रीय-स्तरीय पहचान दिलाने में उनका योगदान ऐतिहासिक है। उनकी शिक्षण शैली ने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का माध्यम बनाया। दशकों तक उन्होंने पत्रकारिता छात्रों को तथ्यपरक, नैतिक और संवेदनशील पत्रकार बनने का प्रशिक्षण दिया। उनके जाने से पत्रकारिता जगत में गहरी शून्यता महसूस की जा रही है।
डॉ. रामजी लाल जांगिड का जन्म 7 नवंबर 1939 को हुआ था। भाषा और संचार के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें पत्रकारिता के अकादमिक और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में अग्रणी बनाया। उन्होंने उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की।
भारतीय जनसंचार संस्थान में हिंदी पत्रकारिता विभाग की औपचारिक और संगठित शुरुआत डॉ. जांगिड के नेतृत्व में हुई। वे इसके पहले अध्यक्ष बने और विभाग को पाठ्यक्रम, संसाधन और शोध की दृष्टि से मजबूत किया। उन्होंने समाचार लेखन, संपादन, रेडियो-टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया, जिससे छात्र बदलते मीडिया परिदृश्य में सक्षम हो सकें।
उनकी शिक्षण पद्धति संवाद और बहस पर आधारित थी। वे छात्रों को भाषा की सादगी, तथ्यों की पुष्टि, और पत्रकारिता में नैतिक जिम्मेदारी का महत्व समझाते थे। उनके अनुसार, एक पत्रकार का पहला कर्तव्य समाज के प्रति जवाबदेही है, न कि केवल समाचार देना।
डॉ. जांगिड ने पत्रकारिता में नैतिकता और सामाजिक संवेदनशीलता को केंद्रीय स्थान दिया। वे छात्रों को यह सिखाते थे कि पत्रकारिता का मकसद केवल घटनाओं को दर्ज करना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और सशक्त बनाना है। उनकी कक्षाओं में सामयिक विषयों पर खुलकर चर्चा होती थी, जिससे छात्रों में आलोचनात्मक दृष्टि का विकास होता था।
अपने जीवनकाल में डॉ. रामजी लाल जांगिड ने पत्रकारिता शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई सम्मान प्राप्त किए। उनके शिष्य आज देश और विदेश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता शिक्षा को जो दिशा और मानक दिए, वे आने वाले वर्षों तक प्रेरणा देते रहेंगे।
Leave Your Comment