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मिशन ‘सुदर्शन चक्र’ क्‍या है जिसकी घोषणा पीएम मोदी ने की है

TLB Desk

नई दिल्‍ली 15 Aug, 2025 03:12 pm

15 अगस्त 2025 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “मिशन सुदर्शन चक्र” की घोषणा की। यह एक नवोन्मेषी रक्षा परियोजना है, जिसका उद्देश्य भारत के महत्वपूर्ण नागरिक, धार्मिक व औद्योगिक स्थलों के आसपास बीस वर्षों में बहु-स्तरीय रक्षा कवच तैयार करना है। यह परियोजना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने तथा संभावित आतंकवादी हमलों के जवाबी हमले की क्षमता भी सुनिश्चित करने का मार्ग है, जिसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित बताया गया।

मिशन का उद्देश्य और स्वरूप

“मिशन सुदर्शन चक्र” का लक्ष्य भारत में एक ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कवच’ (Rashtriya Suraksha Kavach) का निर्माण है, जो रणनीतिक, धार्मिक, औद्योगिक और सार्वजनिक स्थलों पर आधुनिक वायु रक्षा प्रदान करेगा। इसे आइरन डोम की तरह देखा गया है, लेकिन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगा।

सांस्कृतिक और रक्षा सामर्थ्य का मेल

परियोजना का नाम “सुदर्शन चक्र” हिंदू पौराणिक वर्णन में भगवान कृष्ण का तेजस्वी अस्त्र है—सटीकता और शक्ति का प्रतीक। यह नाम इस पहल की गति, आग्रता, और व्यापक सुरक्षा क्षमता को सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बयां करता है। 

आत्मनिर्भरता और तकनीकी विकास

प्रधानमंत्री ने इस मिशन को 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित होगा। इसमें मौजूदा रक्षा प्रणालियों—जैसे कि ‘आकाश प्राइम’ और ‘प्रोजेक्ट कुशा’—का भी समावेश होगा, जिससे भारत की रक्षा आर एंड डी और विनिर्माण क्षमताओं को नया विस्तार मिलेगा। 

बहु-स्तरीय वायु रक्षा संरचना

यह प्रणाली बहु-स्तरीय सुरक्षा कवच (multi-layered shield) प्रदान करेगी जो ड्रोन, मिसाइल, और अन्य हवाई हमलों का सामना कर सके। इसका उद्देश्य न केवल रक्षा करना बल्कि निर्धारित परिस्थितियों में प्रत्यावर्ती स्ट्राइक करने की क्षमता रखना भी है। 

दीर्घकालिक रणनीति व कार्यान्वयन

मिशन सुदर्शन चक्र को अगले 10 वर्षों (2035 तक) में लागू करने की घोषणा की गई है। यह भारत की रक्षा आधुनिकीकरण रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बताए गए समय-सीमा के भीतर तकनीकी व ठोस सुरक्षा ढाँचे का निर्माण सुनिश्चित करेगा। 

मिशन सुदर्शन चक्र न केवल भारत की रणनीतिक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाएगा, बल्कि यह आत्मनिर्भर रक्षा टेक्नोलॉजी के विकास का प्रतीक भी है। यह रक्षा कवच भारत को तेजी से बदलते वैश्विक व सुरक्षा संदर्भों में मजबूत और सक्षम बनाएगा।

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