बिहार की ऊर्जा व्यवस्था को नया आयाम देने वाली एक ऐतिहासिक घोषणा सामने आई है। अडाणी पावर लिमिटेड को राज्य सरकार द्वारा 2400 मेगावाट क्षमता वाले थर्मल पावर प्रोजेक्ट का $3 बिलियन (लगभग ₹25,000 करोड़) का ठेका मिला है। यह परियोजना बिहार की बढ़ती बिजली मांग और औद्योगिक विस्तार को समर्थन देने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास माना जा रहा है।
परियोजना के क्रियान्वयन का जिम्मा अडाणी पावर को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के तहत मिला है। यह पावर प्लांट आने वाले वर्षों में बिहार को ऊर्जा आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
परियोजना का स्थान
इस मेगा थर्मल प्रोजेक्ट को बिहार के औरंगाबाद या लखीसराय जिले में स्थापित किए जाने की संभावना है, जहाँ पूर्व में अधिग्रहित औद्योगिक भूमि और जल स्रोत की उपलब्धता है।
प्लांट में सुपरक्रिटिकल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा जो कम कोयले में अधिक ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित करता है और कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करता है। इसमें दो यूनिट्स होंगी—प्रत्येक 1200 मेगावाट की।
वर्तमान में बिहार अपनी कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 35–40% हिस्सा बाहर से खरीदता है, जो राज्य के वित्तीय संसाधनों पर भारी पड़ता है। यह थर्मल प्लांट पूरा होने के बाद राज्य की निर्भरता को कम करेगा और राज्य में 24x7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे औद्योगिक निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा और ‘मेक इन बिहार’ अभियान को गति मिलेगी।
परियोजना निर्माण के दौरान 10,000 से अधिक अस्थायी नौकरियाँ सृजित होंगी, जबकि संचालन के दौरान लगभग 1,500 स्थायी रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्थानीय स्तर पर सड़क, बिजली, पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं का भी विकास होगा। इसका असर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप से पड़ेगा।
हालाँकि कोयला आधारित संयंत्रों को लेकर पर्यावरणीय चिंता बनी रहती है, लेकिन अडाणी समूह ने यह आश्वासन दिया है कि संयंत्र राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) और पर्यावरण मंत्रालय के सभी मानकों का पालन करेगा।
प्लांट में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम, एश डस्ट कलेक्टर, और ग्रीन बेल्ट डेवलपमेंट जैसे उपाय लागू किए जाएँगे।
बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री ने इस परियोजना को "राज्य के लिए गेमचेंजर" बताते हुए कहा कि, "हम बिजली उपभोग करने वाले राज्य से बिजली उत्पादक राज्य की ओर बढ़ रहे हैं। यह बिहार की औद्योगिक दिशा को पुनर्परिभाषित करेगा।"
प्रोजेक्ट टाइमलाइन और लागत
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