राज्य की राजनीति में उबाल लाने वाली एक दर्दनाक और भयावह घटना बुधवार रात कूच बिहार जिले के सुभाष पाड़ा इलाके में सामने आई, जब एक 3 महीने की गर्भवती महिला पर कथित रूप से तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने जानलेवा हमला कर दिया। आरोप है कि महिला को सिर्फ इस वजह से निशाना बनाया गया क्योंकि वह और उसका परिवार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का समर्थन करते हैं।
पीड़िता के परिवार वालों के अनुसार, शाम के समय कुछ स्थानीय टीएमसी समर्थक उनके घर में घुस आए और महिला से बहस करने लगे। जब महिला ने खुद को बचाने की कोशिश की, तो उसे ज़मीन पर गिराकर पेट में लात मारी गई। इससे न सिर्फ उसकी तबीयत बिगड़ गई, बल्कि गर्भस्थ शिशु की स्थिति को लेकर भी संकट खड़ा हो गया।
घटना के बाद परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस बुलाई, लेकिन आरोप है कि टीएमसी समर्थकों ने रास्ते में ही एंबुलेंस को रोक दिया और चालक को धमकी दी कि अगर वह पीड़िता को अस्पताल ले गया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह सब करीब 25 मिनट तक चला, और जब एंबुलेंस किसी तरह मौके से निकली, तब तक महिला की हालत काफी बिगड़ चुकी थी।
उसे कूच बिहार जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि समय पर इलाज न मिलने के कारण स्थिति गंभीर हो गई थी। फिलहाल महिला की हालत स्थिर है, लेकिन उसे निगरानी में रखा गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही बीजेपी ने राज्य सरकार और टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "ये लोकतंत्र नहीं, लाठीतंत्र है। जब आम नागरिक को अपने राजनीतिक विचार के कारण मारा जाए, तो यह राज्य संविधान के संकट की ओर बढ़ रहा है।"
पार्टी ने राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए कहा है कि ममता सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। इसके साथ ही पार्टी ने राज्यपाल और राष्ट्रीय महिला आयोग से हस्तक्षेप की अपील की है।
हालाँकि टीएमसी की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति नहीं आई है, लेकिन स्थानीय टीएमसी नेता रमेश राय ने एक वीडियो बयान में कहा, "अगर कोई बीजेपी का झंडा लहराएगा, तो उसे परिणाम भुगतना ही होगा। यहाँ टीएमसी का राज है।"
इस बयान ने पूरे मामले को और ज्वलंत बना दिया है। विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने इस बयान की तीखी निंदा की है और कहा है कि यह बयान खुलेआम हिंसा को बढ़ावा देने वाला है।
यह घटना न केवल राजनीतिक असहिष्णुता को उजागर करती है, बल्कि महिला सुरक्षा, लोकतांत्रिक अधिकार और मानवता जैसे मूल्यों पर भी सवाल उठाती है। जब राजनीतिक भेदभाव का स्तर इतना नीचे गिर जाए कि एक गर्भवती महिला को उसकी विचारधारा के कारण निशाना बनाया जाए, तब यह समाज के लिए चेतावनी की घंटी है।
यह घटना यह भी बताती है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी टकराव सिर्फ चुनावों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब वह नागरिक जीवन के हर स्तर को प्रभावित करने लगा है—चाहे वह एक महिला हो, बच्चा हो या बुजुर्ग।
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