सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में उस समय ऐतिहासिक क्षण साकार हुआ, जब भारत की सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक मां सीता के मंदिर का शिलान्यास समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से विधिपूर्वक मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी। कार्यक्रम में देशभर से आई 112 पवित्र नदियों के जल और 36 तीर्थस्थलों की मिट्टी का उपयोग कर इसे भव्य धार्मिक प्रतीक में रूपांतरित किया गया।
भूमि पूजन और सांस्कृतिक गौरव
पुनौरा धाम को सीता माता की जन्मस्थली के रूप में मान्यता प्राप्त है और वर्षों से यहां एक भव्य मंदिर निर्माण की मांग उठती रही है। आज यह सपना साकार हुआ। वैदिक रीति-रिवाजों के साथ भूमि पूजन संपन्न हुआ। पुरोहितों और संतों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ समूचे स्थल को पवित्र वातावरण में रूपांतरित किया गया।
शिलान्यास स्थल पर विशेष तौर पर तैयार मंच पर अमित शाह और नीतीश कुमार ने एक साथ आधारशिला रखी, जो धार्मिक और राजनीतिक समरसता का प्रतीक बना।
कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा, “मां जानकी भारत की संस्कृति, त्याग और नारी शक्ति का प्रतीक हैं। यह मंदिर राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा मंदिर होगा।”
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “सीता माता सिर्फ मिथिला या बिहार की नहीं, संपूर्ण भारत की बेटी हैं। यह मंदिर हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की पुनर्स्थापना है।”
शिलान्यास में प्रयुक्त सामग्री ने इस आयोजन को विशेष महत्व दिया। आयोजन में प्रयुक्त जल देश की 112 पवित्र नदियों — जैसे गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, कृष्णा आदि — से लाया गया था। साथ ही 36 तीर्थ स्थलों की मिट्टी, जिसमें अयोध्या, काशी, पुष्कर, द्वारका, कामाख्या जैसे स्थल शामिल हैं, उसे नींव में मिलाया गया। यह भारत की आध्यात्मिक एकता का जीवंत उदाहरण बना।
पर्यटन और स्थानीय विकास की संभावना
सरकार के अनुसार, यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि मिथिला क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। अनुमान है कि इससे सालाना लाखों पर्यटक सीतामढ़ी आएँगे, जिससे होटल, परिवहन, और स्थानीय रोजगार को गति मिलेगी। मंदिर परिसर के साथ-साथ सड़क, विद्युत और आवासीय ढांचे में भी निवेश किया जाएगा।
भविष्य की योजनाएँ
राज्य सरकार और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय मिलकर मंदिर निर्माण परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य बना चुके हैं। निर्माण के लिए विशेष 'मिथिला स्थापत्य शैली' का उपयोग होगा और परिसर में धर्मशाला, सांस्कृतिक संग्रहालय और ध्यान कक्ष भी होंगे।
स्थानीय जनता, महिलाएँ, बच्चे और युवा सुबह से ही बड़ी संख्या में पहुंचे। कई श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे और जय-सीताराम के उद्घोष से माहौल को भक्तिमय बना दिया। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
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