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LIC में हिस्सेदारी बिक्री से सरकारी खजाना होगा मजबूत

Babita Pant

नई दिल्‍ली 14 Aug, 2025 11:12 am

भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने विनिवेश कार्यक्रम के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में हिस्सेदारी बिक्री का निर्णय लिया है। इस कदम से सरकारी खजाने में लगभग ₹17,000 करोड़ की बड़ी राशि आने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में निवेश के लिए करना है, जिससे विकास परियोजनाओं की रफ्तार तेज हो सके।

सरकारी नीति में रणनीतिक बदलाव

विनिवेश नीति के तहत सरकार लगातार सार्वजनिक उपक्रमों में निजी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। LIC में हिस्सेदारी की बिक्री इस नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम न केवल सरकारी राजस्व को मजबूती देगा बल्कि वित्तीय बाजारों में निजी निवेशकों के लिए नए अवसर भी खोलेगा।

वित्तीय लाभ और संभावित प्रभाव

करीब ₹17,000 करोड़ की आय से सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, पूंजीगत व्यय के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विनिवेश से बाजार में तरलता बढ़ेगी और LIC के शेयरों में निवेशकों की रुचि भी बढ़ सकती है, जिससे कंपनी के मूल्यांकन को लाभ होगा।

सार्वजनिक क्षेत्रीय बैंकों में हिस्सेदारी में कटौती

LIC के अलावा, सरकार ने पांच सार्वजनिक क्षेत्रीय बैंकों में भी अपनी हिस्सेदारी घटाने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना है। इस कदम से बैंकिंग सेक्टर में परिचालन कुशलता और वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आर्थिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विनिवेश कदम आर्थिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। निजीकरण और रणनीतिक विनिवेश के जरिए सरकार अपने वित्तीय ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी गति दे सकती है। इससे देश में निजी निवेश का माहौल और अनुकूल हो सकता है।

LIC और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रीय संस्थानों में हिस्सेदारी बिक्री केवल राजस्व बढ़ाने का साधन नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक आर्थिक नीति का हिस्सा है, जिसमें सरकार सार्वजनिक क्षेत्र में दक्षता, प्रतिस्पर्धा और निजी भागीदारी को बढ़ावा देना चाहती है। यदि यह रणनीति सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत के वित्तीय परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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