अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ—विशेषकर रूस से तेल की खरीद के मद्देनजर—के बाद, भारत और रूस ने आज अपनी “रणनीतिक साझेदारी” को फिर एक बार दोहराया। यह पुष्टि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और रूस के सुरक्षा परिषद सचिव सर्गेई शोइगु के बीच मॉस्को में हुई द्विपक्षीय बैठक में हुई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत के खिलाफ टैरिफ दरों को बढ़ा कर कुल 50% कर दिया—जिसमें 25% अतिरिक्त शुल्क उसका "परिमार्जित दंड" था, खासकर रूस से तेल और हथियार खरीदने के कारण। इस निर्णय को विश्व बाजार में ऊर्जा और रक्षा संबंधी साझेदारियों पर अमेरिकी असंतोष के रूप में देखा गया।
उसी समय, भारत ने कूटनीतिक और व्यापारिक रूप से अमेरिका के दबाव के बीच रूस के साथ लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को बनाए रखने पर जोर दिया। भारत ने इस संबंध को समय‑परीक्षित और भरोसेमंद बताया।
बैठक और घोषणाएँ
मॉस्को की यह वार्ता 7 अगस्त को हुई और इसमें दोनों पक्षों ने रणनीतिक साझेदारी को सांकेतिक और प्रभावी बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। अजीत डोभाल ने बैठक में उल्लेख किया कि भारत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की संभावना के संदर्भ में सकारात्मक रूप से देख रहा है।
इसके अलावा आर्थिक सहयोग को भी विस्तार देने की मुहिम तेज हुई। आज ही एक अलग घटना में, भारत‑रूस ने अल्यूमीनियम, उर्वरक, रेलवे और खनन तकनीक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 11वीं अंतर‑सरकारी कार्यसमिति के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। इसमें तकनीकी हस्तांतरण और औद्योगिक विकास पर विशेष रूप से ज़ोर दिया गया।
औद्योगिक और ऊर्जा संबंधों की मजबूती
भारत की आवश्यकता—विशेष रूप से कच्चे तेल की आपूर्ति और रक्षा उपकरण—रूस द्वारा प्रदान की जाने वाली स्थिरता से प्रभावित होती रही है। अमेरिका की आलोचना के बावजूद, दिल्ली ने संकेत दिया है कि वह राष्ट्रीय हित के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेता रहेगा।
सूत्रों का कहना है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं औद्योगिक समर्थन में रूस की भूमिका अब भी केंद्रीय है, और इन क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने की योजना है।
भारत-यूएस संबंधों पर प्रभाव
ट्रम्प के टैरिफ निर्णय के कारण भारत‑अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ा है, जो क्वाड शिखर सम्मेलन की योजनाओं को भी प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी नीतियों और दबावों के बीच भारत ने एक स्वतंत्र बहुपक्षीय विदेश नीति चुनने का संदेश दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत की यह रणनीति—पश्चिम और रूस दोनों के साथ संबंधों को संतुलित रखना—उसे वैश्विक कूटनीतिक सतह पर मध्यम शक्ति (middle power) के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ की मार के बीच भारत और रूस ने अपनी रणनीतिक साझेदारी की मजबूती को फिर सिद्ध किया है—सुरक्षा, ऊर्जा, औद्योगिक सहयोग और कूटनीतिक विश्वास पर आधारित यह गठबंधन अब भी टिका हुआ है। दोनों देशों का यह स्पष्ट मोर्चा भारत की विदेश नीति में आत्मनिर्भरता और संतुलन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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