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अमेरिकी टैरिफ वार के बीच रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा तय

TLB Desk

India 08 Aug, 2025 01:33 pm

इंटरफैक्स समाचार एजेंसी ने पुष्टि की कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगस्त के अंत में भारत की राजकीय यात्रा पर आने वाले हैं। यह जानकारी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा साझा की गई। पुतिन की यह बहुप्रतीक्षित यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों में तीव्र परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं—चीन और अमेरिका के बीच तकनीकी और व्यापारिक तनाव, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिमी प्रतिबंधों का नया दौर, और BRICS जैसे वैकल्पिक बहुपक्षीय मंचों का उभार।

भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी रही है। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और कूटनीति—इन चारों क्षेत्रों में सहयोग की मजबूत नींव है। 21वीं सदी के आरंभ में भारत-रूस संबंधों को "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" का दर्जा दिया गया था।

पुतिन की यह यात्रा 2021 के बाद पहली द्विपक्षीय भारत यात्रा होगी, जब उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस यात्रा का उद्देश्य सिर्फ परंपरागत सहयोग को दोहराना नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक संदर्भ में इन संबंधों को एक नई दिशा देना भी है।

मुख्य एजेंडा: रक्षा, ऊर्जा और व्यापार

  1. रक्षा क्षेत्र में सहयोग की पुनर्पुष्टि

रूस, भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है। हालाँकि हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा आपूर्ति में विविधता लाई है, लेकिन S-400 मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना और अपग्रेडेड लड़ाकू टैंकों जैसे कई कार्यक्रम आज भी भारत-रूस रक्षा संबंधों की रीढ़ हैं।
पुतिन की यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बीच नई रक्षा तकनीक के सह-निर्माण (co-production), मेंटेनेंस कॉरिडोर, और ड्रोन टेक्नोलॉजी पर समझौते होने की संभावना है।

  1. ऊर्जा सहयोग: तेल और न्यूक्लियर समझौते

यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस भारत को भारी छूट पर कच्चा तेल बेच रहा है। पुतिन की यात्रा के दौरान लॉन्ग टर्म एनर्जी डील्स, गैस पाइपलाइन पर चर्चा और कुदनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की नई यूनिटों पर समझौते की संभावना है।

  1. व्यापार और भुगतान व्यवस्था

पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस अब भारत जैसे देशों के साथ वैकल्पिक भुगतान प्रणाली (रूपया-रूबल ट्रेड) और मुद्रा विनिमय तंत्र पर काम कर रहा है। इस यात्रा में इन पहलुओं को मजबूत करने का एजेंडा होगा।

भूराजनीतिक परिप्रेक्ष्य: वैश्विक मंचों पर भारत-रूस तालमेल

  1. BRICS और वैश्विक दक्षिण

BRICS समूह (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) में भारत और रूस की भूमिका एक स्थायी स्तंभ के रूप में रही है। 2025 में BRICS का विस्तार हुआ है और भारत-रूस दोनों वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आगे बढ़ाने में रुचि रखते हैं। इस संदर्भ में पुतिन की यात्रा, BRICS+ की कार्ययोजना को लेकर भारत-रूस तालमेल को दर्शा सकती है।

  1. पश्चिमी दबावों के बीच संतुलन

भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर संतुलित दृष्टिकोण रखा है—जहाँ उसने युद्ध का खुला समर्थन नहीं किया, वहीं रूस के साथ ऊर्जा और व्यापारिक संबंध भी बनाए रखे। पुतिन की यात्रा भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की निरंतरता को प्रदर्शित करेगी।

इस यात्रा में भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, छात्रवृत्तियों, विश्वविद्यालय सहयोग और रूसी भाषा के अध्ययन जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। रूसी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की संख्या में वृद्धि हो रही है, विशेषकर चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा में।

पुतिन की यात्रा भारत की "बहुपक्षीय रणनीतिक स्वायत्तता" (strategic autonomy) नीति का स्पष्ट संकेत होगी। यह संदेश जाएगा कि भारत न तो पश्चिमी खेमे में पूरी तरह जा रहा है और न ही किसी एक ध्रुवीय गठबंधन का हिस्सा बनना चाहता है। यह यात्रा भारत को एक "विश्वसनीय वार्ताकार" और "मध्यस्थ शक्ति" (balancing power) की भूमिका में प्रस्तुत करेगी।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक और नीतिगत रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह यात्रा वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की भूमिका को परिभाषित करने में सहायक हो सकती है। रक्षा, ऊर्जा और कूटनीति के त्रिकोण में बंधे भारत-रूस संबंध इस दौरे के माध्यम से नए आयाम प्राप्त कर सकते हैं।

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